How to Solve problems in life | संकट/समस्या के प्रति हमारा नज़रिया

How to Solve problems in Life:

समस्या, संकट, कांटे, मुसीबतें – ये कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका हमारी ज़िन्दगी में अक्सर आना-जाना लगा रहता है। कुछ लोग इनसे हार मान लेते हैं और कुछ इनको हरा देते हैं। हमारी ज़िन्दगी में किसी भी समस्या के आने पर हमारा दिमाग दो तरह से react कर सकता है:

how to solve problems in life

One Reaction for solving problems in life:

लो आ गयी एक और मुसीबत, पहले ही क्या कमी थी मुसीबतों की, जो एक और आ गयी। ऊपर वाले को मुझसे कोई खास प्रेम है, जो कोई भी काम सीधे तरीके से तो होने ही नहीं देता। मेरे हर काम में कोई ना कोई अड़चन तो आनी ही है। या ऐसी ही कुछ और बाते, जो ये बताती है कि हम समस्याओं का सामना नहीं करना चाहते।

Second Reaction for solving problems in life:

समस्या से बचने या कोसने के बजाय हमारा दिमाग problem के possible solution ढूंढने लग जाता है।

आप अपने आपको किस category में रखते हैं!

अगर आप अपने आप को दूसरे तरीके के लोगों में रखते हैं तो बहुत अच्छी बात है अन्यथा problems आपकी ज़िन्दगी कभी भी संवरने नहीं देंगी। समस्याओं से हम जितना भागने की कोशिश करेंगे, ये उतना ही पीछे पड़ेंगी। समस्याओं के बारे में जितना सोचेंगे, ये उतनी ही बढ़ती जाएगी और जब समस्या बढ़ेगी तो चिंता बढ़ने लगेगी जब चिंता बढ़ जाएगी तो ज़िन्दगी नर्क बनते देर नहीं लगेगी।

problem के हमारी ज़िन्दगी में दस्तक देने पर हमारा जो भी reaction है वो हमारे positive या negative attitude की बदौलत है। ये हमारे दिमाग की programming है जो हमें लड़ने या भागने की तरफ अग्रसर करती है। तो क्या ईश्वर ने हमारे दिमाग की programming अलग-अलग करके भेजी है जो कुछ तो समस्याओं से तब तक जूझते रहते हैं जब तक की उन्हें हरा ना दें और कुछ थोड़ी देर की लड़ाई के बाद अपने रास्ते बदल लेते हैं। नहीं ऐसा नहीं है, ईश्वर ने कोई भेदभाव नहीं किया। ये तो हमारे आस-पास का परिवेश, हमारी परवरिश, हमारे आस-पास के लोग हैं, जो हमारे दिमाग की programming पर असर डालते हैं।

मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि अभी भी हमारे दिमाग की programming ऐसी ही है कि अगर हमारे रास्ते में कोई कांटा आये तो दिमाग लगातार उसे हटाने के सन्देश ही भेजेगा, ना कि उसे ऐसे ही छोड़ देगा। आपको विश्वास नहीं होता तो चलिए एक practical करके देखते हैं।

Trouble/Problem Solving tips in Hindi:

आज एक काम करें, कुछ ऐसा खाएं जो खाते समय आपके दांत में फंस जाये। जैसे की सर्दियों में अमरुद, अमरुद खाते समय अक्सर उसके बीज हमारे दांतों में फंस जाते हैं। फिर उसके बाद क्या आपने notice किया है कि क्या होता है? हमारा दिमाग जीभ को सन्देश भेजने लगता है, इस बीज को हटाओ और जीभ तुरंत अपने काम में लग जाती है। ये मुंह के हर कोने में पहुँच कर पता करती है बीज कहाँ फंसा है और फिर उसे निकालने के काम में लग जाती है। एक बार कोशिश, दो बार, तीन बार …………….जीभ तब तक लगी रहेगी जब तक की ये बीज निकाल नहीं देती, अन्यथा ये आराम नहीं करेगी।

ज्यादातर तो जीभ अपनी कोशिशों से इस बीज को निकाल देगी, फिर भी कभी ऐसा नहीं हो पाया तो फिर क्या होगा? हमारा दिमाग अब हाथ को message देगा कि जीभ को success नहीं मिल रही, इसलिए तुम्हे मुंह में जाकर कोशिश करनी पड़ेगी। फिर हम अपनी उंगुलियों से उस बीज को दांतों के बीच से निकालने का प्रयास करेंगे। अब इसमें success मिल गयी तो अच्छा नहीं तो क्या हम शांत बैठ जायेंगे? नहीं बैठेंगे, तुरंत कोई ऐसी चीज ढूंढेंगे जिससे दांत खोदा जा सके और ऐसी चीज के मिलते ही उससे बीज को दांतों के बीच से बाहर निकाल देंगे।

इसका मतलब हमारा दिमाग तब तक शांत नहीं हुआ जब तक कि उसने मुंह में फंसे हुए बीज को निकाल नहीं दिया। means हमारा दिमाग सही programmed है, उसने सबसे पहले वो हथियार use किया जो तुरंत उपलब्ध था और लचीला था। उससे सफ़लता नहीं मिली तो थोडा मज़बूत हथियार और जब उससे भी सफ़लता नहीं मिली तो और मज़बूत/दृढ हथियार। समस्याओं के समाधान का मेरा sequence भी यही है, पहले लचीला बनकर समस्या की जड़ में पहुचने और समाधान करने की कोशिश और समाधान नहीं होने पर, कोशिशों को और मज़बूत करते रहने का सन्देश हमारा दिमाग हमें पहुंचाता है।

Problem Solving tips by “Law of Seed”:

बहुत समय पहले मैंने “law of seed” पढ़ा था उसे मैं यहाँ इसी सन्दर्भ से जोड़ते हुए अपने शब्दों में आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। मान लीजिये आपको Apple के 100 पेड़ लगाने हैं तो क्या आप 100 बीज ही बोयेंगे? नहीं, आपको 1000 से भी ज्यादा बीज बोने पड़ सकते हैं। पर क्यों, 100 बीज लगाने से 100 apple के पेड़ क्यों नहीं उग जाते। Nature हमें यहाँ कुछ सिखाना चाह रहा है। आप जितने seeds बोओगे उनमे से कुछ ही grow करेंगे, ज्यादातर seed तो कभी grow करेंगे ही नहीं और कुछ grow करके भी सूख सकते हैं। और यही life में भी होता है, ज्यादातर प्रयासों में असफलता।

अगर हम वाकई में life में कुछ करना चाहते है तो हमें एक से ज्यादा बार और कई बार प्रयास करना पड़ेगा। इसका मतलब हो सकता है कि हमें 25 interview देने के बाद एक अच्छी job मिले या एक salesman 50 लोगों से बात करने के बाद किसी एक को अपना material खरीदने के लिए राजी कर सके या सेकड़ों लोगों से मिलने के बाद हमें एक अच्छा दोस्त मिले। लेकिन जो भी है अगर हम “law of seed” को समझ लेते हैं तो असफलता हमें निराश नहीं करती, हम disappoint नहीं होते क्योंकि हम समझ जाते हैं successful लोग भी अक्सर असफल होते हैं पर वो बीज ज्यादा बोते हैं।

इसलिए दोस्तों मुसीबतों से लड़ना है तो तुरंत ही अपना attitude बदल लीजिये। मुसीबत को मुसीबत न समझ एक चुनौती के तरह लीजिये और फिर भिड जाईये चुनौती को धवस्त करने के लिए। और याद रखिये, जब बीज हजारों होंगे तो कुछ बीज अंकुरित जरूर होंगे।

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संकट/समस्या के प्रति हमारा नज़रिया
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समस्यायों के प्रति अपने नजरिये में बदलाव लाकर हम अपने जीवन में बहुत बदलाव ला सकते हैं। Law of Seed के जरिए हम समझ सकते हैं कि कैसे कुछ बदलाव से जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।

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