Tenaliram ke rochak kisse - तेनालीराम के घर में चोर

Hindi story – Tenaliram and thief

तेनालीराम की बुद्धिमता पर रोशनी डालती एक और हिंदी कहानी आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ :

तेनालीराम

ये सर्दियों के दिनों की बात है। तेनालीराम इत्मीनान से घर पर बैठकर रात के भोजन का आनन्द ले रहे थे कि अचानक उन्हें अपने घर के आँगन से बहुत हल्की सी एक आवाज़ सुनाई दी। उन्हें लगा कोई चूहा-बिल्ली आ गई होगी और ये सोचकर तेनालीराम फिर से खाने में मगन हो गए।

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भोजन कर लेने के बाद जब तेनालीराम बाहर आँगन में हाथ धोने के लिए आए तो उन्हें आँगन में रखे लकड़ियों के ढेर के पीछे एक मानव आकृति दिखाई दी। तेनाली को सारा माजरा समझ  में आ गया कि वह व्यक्ति कोई चोर है और उन्होंने अभी जो आवाज़ सुनी थी  वो इसी चोर के आँगन में घुसने की थी। उन्हें ये भी एहसास हो गया कि यदि उन्होंने इस वक़्त आवाज़ लगाई तो यह चोर बाहर आ सकता है और वह कोई हथियार भी निकाल सकता है।

तेलानीराम ने पूरी की इच्छा

तेनालीराम हाथ धोते धोते ही चोर को पकड़ने की तरकीब सोचने लगे। कुछ सोच-विचार कर उन्होंने पत्नी को आवाज़ लगाई और एक बाल्टी पानी लाने को कहा। पत्नी ने सोचा हाथ धोने के लिए पानी मांग रहे होंगे तो वह भरी बाल्टी रखकर वापस अन्दर चली गई। तेनाली ने उस पानी से भरी बाल्टी को उठाया और सारा पानी लकड़ियों के ढेर पर उछाल दिया। उन्होंने फिर पत्नी को आवाज़ लगाई और बाल्टी भर पानी मंगवाया। पत्नी जब पानी लेकर आई तो उन्होंने फिर उस पानी को लकड़ियों के ढेर पर उछाल दिया।

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तेनाली ने नौ बार ऐसा ही किया, पत्नी से पानी मंगवाते और उसे लकड़ियों के ढेर पर फेंक देते। जब एक बार और उन्होंने अपनी पत्नी को पानी लाने को कहा तो पत्नी को गुस्सा आ गया और वो ज़ोर-ज़ोर से बडबडाने और कोसने लगी। तेनालीराम तो जैसे इसी घडी का इन्तेजार कर रहे थे, उन्होंने भी आव देखा ना ताव, तुरंत एक जग पानी पत्नी के सिर पर डाल दिया। अब तो उनकी पत्नी का गुस्सा  सातवें आसमान पर पहुँच गया, वह और जोर से चीखने-चिल्लाने लगी।

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तेनाली भी अपनी पत्नी के गुस्से को शांत करने के बजाय उसे और बढ़ाते रहे। गुस्सा बढ़ने के साथ ही उनकी पत्नी की आवाज़ भी बढती रही। उनकी पत्नी के इस तरह से लगातार चीखने -चिल्लाने से ये आवाज़े तेनाली के पडौसियों तक पहुँच गई और वो लोग तेनाली के घर पहुँच गए। वहाँ पहुंचकर वो लोग तेनाली से उसकी पत्नी के चीखने-चिल्लाने का कारण पूछने लगे।

शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग 

तेनालीराम ने बड़ी तसल्ली से मुस्कुराते हुए कहा,”कोई खास बात नहीं है। ये एक मेरी पत्नी है, जिसकी सुख-सुविधा का मैं पूरा ध्यान रखता आया हूँ, फिर भी एक जग पानी डाल देने पर इसने आसमान सिर पर उठा लिया और एक वह अजनबी है, जिस पर मैंने दस बाल्टी पानी डाल दिया पर बेचारे ने चूं तक नहीं की। “

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यह सुनते ही पडौसियों को सारा माज़रा समझ में आ गया और उन्होंने चोर को लकड़ियों के ढेर के पीछे से बाहर निकाला और बांध दिया।

सभी ने तेनालीराम की बुद्धिमता की जमकर तारीफ की।

Moral – तेनालीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य बनाए रखा। उन्हें एहसास था कि अकेले इस चोर का सामना करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए उन्होंने ऐसा रास्ता निकाला कि चोर को पता भी नहीं चला और उन्होंने अपने पडौसियों को इकठ्ठा भी कर लिया और फिर चोर को आसानी से पकड़ लिया।

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