Most Important body part | शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग

Our most important body part:

बचपन से मेरी माँ अक्सर मुझसे एक सवाल किया करती थी कि हमारे शरीर का most important body part कौनसा है?

उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर मैंने इस सवाल के अलग-अलग जवाब दिए और हेमशा यही माना कि मैं सही जवाब दे रहा हूँ।

जब मैं छोटा था तो मुझे लगता था as a human आवाज़ हमारे लिए बहुत important है क्योकि आवाज़ सुनकर ही हम बोलना सीखते हैं।इसलिए मैं जवाब देता, “माँ, हमारे कान हमारी body का  बहुत important अंग है।”

माँ कहती,”नहीं, इस दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो deaf हैं और बिना आवाज़ सुने भी अपने काम करते हैं इसलिए कान इतने important नहीं हैं। तुम अभी इसके बारे में और सोचो, मैं तुमसे इसके बारे में जल्दी ही फिर से पूछूंगी।”

कुछ समय बाद माँ ने फिर से मुझसे वही सवाल पूछा। क्योंकि अपने first attempt में मैंने इसका गलत जवाब दिया था, तो मैं तभी से इस सवाल का सही जवाब ढूंढ रहा था। माँ के फिर से वही सवाल पूछने पर मैंने इस बार जवाब दिया,”माँ, रोशनी का हर इंसान के जीवन में बहुत महत्व है क्योंकि हम देखकर बहुत सारी चीजें सीखते हैं। इसलिए हमारी eyes ही हमारी most important body part होनी चाहिए।”

माँ ने मुझे देखा और कहा,”बेटा, तुम बहुत अच्छी कोशिश कर रहे हो पर ये जवाब भी सही नहीं है। दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो blind हैं और बिना देखे भी अपने काम करते हैं इसलिए आँखें भी इतनी important नहीं हैं।”

फिर से मैं confuse हो गया। लेकिन अपनी knowledge बढ़ाने की सोच कर मैं इस बारे में जानकारी जुटाने में लगा रहा। माँ ने अगले कुछ वर्षों में मुझसे यही सवाल फिर से कई बार किया। मैं भी हर बार कोई नया जवाब देता और माँ यही कहती,”बेटा, तुम अच्छी कोशिश कर रहे हो, पर अभी भी सही जवाब नहीं दे पाये हो।”

इसी बीच एक दिन मेरे दादा जी की मौत हो गयी। घर में सभी लोग बहुत दुखी थे। सभी रो रहे थे, यहाँ तक की मेरे father भी रो रहे थे, जिन्हे मैंने पहली बार ही रोते हुए देखा था।

जब दादा जी को आखिरी good-bye कहना का समय आया तो मेरी माँ ने मुझे देखा और कहा,”क्या तुम अब बता सकते हो, most important body part कौनसा है?” इस समय पर ये सवाल सुनकर मैं चौंक गया क्योंकि मुझे ऐसा लगने लगा था कि ये मेरे और माँ के बीच एक time pass का जरिया है। माँ ने मेरे चेहरे पर confusion को पढ़ लिया और कहा,”यह सवाल बहुत important है। इसका जवाब पता होना बहुत जरूरी है क्योंकि इसी से पता चलता है कि तुमने अपनी ज़िन्दगी सही तरह से जी या नहीं। आज तक तुमने मुझे जितने भी body part बताये, मैंने सब को गलत बताया और तुम्हे उसका कारण भी दिया। लेकिन आज वो दिन है जब तुम्हे इस important lesson को सीखने की जरूरत है।”

उन्होंने मेरी तरफ ममता भरी नज़रों से देखा। मुझे उनकी आँखों में आंसू साफ नज़र आ रहे थे। उन्होंने मुझसे कहा,“बेटा, तुम्हारी body का सबसे important part तुम्हारे कंधे हैं।”

most important body part

मैंने पूछा,”क्या इसलिए क्योंकि कंधों ने मेरे सिर को संभाल रखा है?”

माँ ने जवाब दिया,“नहीं, इसलिए नहीं, क्योंकि इन्होने तुम्हारे सिर को संभाल रखा है बल्कि इसलिए क्योंकि ये दुःख के समय किसी भी दोस्त या प्रियजन के सिर को संभाल सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को ज़िन्दगी में कभी ना कभी एक ऐसे कंधे की जरूरत पड़ती है जिस पर सिर रखकर वो रो सके, अपना दुःख बाँट सके।” उन्होंने आगे कहा,”मैं यही दुआ करती हूँ कि तुम्हे इतना प्यार और दोस्त मिलें की जब कभी भी तुम्हारे जीवन में दुःख के घडी आये और तुम्हे अपना सिर रखकर रोने की जरूरत महसूस हो तो तुम्हारे लिए कंधों की कोई कमी ना रहे और बेटा ये भी याद रखना कि जब कभी तुम्हारे किसी प्रियजन या दोस्त के ऊपर दुःख की घडी आये तो तुम्हारा कन्धा सबसे पहले उन्हें सहारा देने के लिए मौज़ूद रहे।”

उसी समय मुझे इस बात का एहसास हुआ कि most important body part वो नहीं है जो सिर्फ मेरे काम आये, बल्कि वो है जो सभी के लिए काम आ सके।

दोस्तों ये कहानी हमें बताती है कि हमें selfish नहीं होना चाहिए। सिर्फ अपने लिए ज़िन्दगी नहीं जीनी चाहिए। जीने का मज़ा तभी है जब हर सुख-दुख की घडी में घर-परिवार के लोग, हमारे दोस्त सब साथ हों। किसी की जरूरत पर उसको कन्धा मिलने के एहसास को हम तब अच्छे से महसूस कर पाते हैं, जब हमारी जरूरत पर कोई कन्धा हमें सहारा देने आगे आता है। हमें ये याद रखना चाहिए, अच्छाई या बुराई हमेशा लौट के आती है।

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