Inspirational Moral Stories | क्या आपने ढूँढा नया रास्ता?

Inspirational Moral Stories | क्या आपने ढूँढा नया रास्ता?

Inspirational Moral Stories

एक जंगल में सभी मवेशी चारा चर रहे थे। इस दौरान एक बछड़ा अपने झुण्ड से बिछड़ गया। चारे के बाद अब उस बछड़े को गाँव की गौशाला तक लौटना था। नन्हा बछड़ा चट्टानों, मिट्टी के टीलों और ढलानों से उछलता – कूदता हुआ आख़िरकार गौशाला तक पहुँचने में सफल हो गया। उस रास्ते पर खुरों के निशान देख अगले दिन एक कुत्ते ने भी गाँव तक पहुँचने के लिए उसी रास्ते का इस्तमाल किया। उसके अगले दिन एक भेड़ भी गाँव तक पहुँचने के लिए उसी रास्ते पर चल पड़ी। अब एक भेड़ को उस रास्ते पर चलता देख दूसरी भेड़ें भी उसके पीछे चल पड़ीं। आखिर हैं तो भेड़ें ही।

उस रास्ते पर चलाफिरी के निशान देखकर गाँव के लोगों ने भी उस रास्ते का इस्तेमाल शुरू कर दिया। ऊँची-नीची पथरीली जमीन पर आते जाते समय गाँव के लोग उस रास्ते को कोसते रहते। रास्ता था भी ऐसा दुरह कि कोई भी उसे कोसे। दुरह होने के बावजूद सभी लोग गाँव तक पहुँचने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करने लगे। लेकिन किसी ने भी सरल – सुगम पथ की खोज के लिए कोई प्रयास नहीं किया। समय बीतने के साथ वह पगडंडी उस गाँव तक पहुँचने का मुख्य मार्ग बन गई। जिस पर बेचारे पशु बमुश्किल गाड़ी खींचते और गाँव पहुँचते। और अधिक समय बीतने पर वह गाँव एक नगर बन गया और यह दुर्गम रास्ता राजमार्ग बन गया।

बूढ़ा जंगल यह सब बहुत समय से देख रहा था। वह बरबस मुस्कुराता और सोचता रहता कि “मनुष्य हमेशा ही सामने खुले पड़े विकल्प को मजबूती से जकड लेता है।” वह विचार ही नहीं करता कि कहीं कुछ उससे बेहतर भी किया जा सकता है। उस कठिन पथ के स्थान पर कोई सुगम पथ होता तो लोगों को यात्रा में न केवल समय की बचत होती, वरन वे सुरक्षित भी रहते। लेकिन उस पथ की समस्याओं पर चर्चा करते रहने के अतिरिक्त किसी ने कभी कुछ नहीं किया।

§ Inspirational Moral Stories in Hindi

उस कठिन पथ पर परेशान होते रहने के बावजूद किसी ने भी नहीं सोचा कि क्या इसी रास्ते को सुगम बनाया जा सकता है? या कोई और रास्ता ढूंढा जा सकता है, जो इससे सुगम हो? सब लोग उस पगडण्डी को कोसते लेकिन उसका इस्तेमाल करते रहे।

दोस्तों आपको नहीं लगता ये कहानी हमारे सोचने के तरीके पर चोट करती है! क्या हम भी हमेशा ऐसा ही नहीं करते? क्या हम भी ऐसे ही बिना सोचे सामने पड़े खुले विकल्प पर चलना शुरू नहीं कर देते? हम में से कुछ लोग तब जरूर किसी नए रास्ते के बारे में सोचेंगे, जब आगे कोई भी रास्ता दिखाई ही नहीं दे रहा हो। वो भी सिर्फ कुछ लोग। लेकिन अगर रास्ता दिखाई दे रहा हो, फिर भले वो दुर्गम ही क्यों न हो, हम उस पर चलना ही पसंद करेंगे। क्योंकि हमारी सोच यह है कि अन्जान रास्तों का क्या पता, वो कहाँ लेकर चले जाएँ?

ये तो थी एक कहानी जो बताती है कि अगर हमें किसी मंजिल तक पहुँचने का कोई रास्ता पता हो तो हम उसी रास्ते का अनुसरण करेंगे। कभी कोई नया रास्ता खोजने की कोशिश ही नहीं करेंगे। अब मैं अपनी अगली post में आपको एक सच्चाई बताऊंगा, जिससे पता चलता है यदि हम नए रास्तों को खोजना शुरू करें तो उसके कितने सुखद परिणाम भी हो सकते हैं। जरूरी नहीं हमेशा होंगे, लेकिन जब होंगे तो दिल खुश कर देंगे।

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Comments

  1. मंजिल उन्हें ही मिलती है जो रास्तों पर चलना शुरू करते है । जो हमारे पास है उसे भाग्य मान कर कोशिश न करने से कुछ बैठेबिठाएं नही मिलने वाला । आपने इस कहानी के माध्यम से यह बात बखूबी समझाया है । धन्यवाद शेयर करने के लिए ।

  2. nice

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