ईश्वर में विश्वास

North America में Niagara (नियाग्रा) नामक एक झरना है, जिसे Niagara Falls कहा जाता है। इसमें पानी की बहुत चौड़ी धार तक़रीबन 165 फीट ऊंचाई से गिरती है। इस झरने के पास खडे हुए किसी भी व्यक्ति को पानी गिरने की कल-कल की आवाज़ बहुत ही भयानक सी प्रतीत होती है। यदि गलती से कोई पानी के झरने में गिर पड़े तो जीवित रहने की कोई आशा नहीं है। 

यह कुछ समय पहले की बात है। एक अमरीकन पहलवान ने यह घोषणा करवाई कि वह Niagara Falls को एक तार पर चलकर पार करेगा। उसकी इस घोषणा के मददेनजर Niagara Falls के एक किनारे से दूसरे किनारे तक एक हवाई जहाज की सहायता से ठीक झरने के ऊपर से तार फैलाया गया। तय तारीख से पहले सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी। अब पहलवान ने जो दिन final किया था, उस दिन उसके इस दुस्साहसी कौशल को देखने के लिए बहुत भीड़ इकट्ठी हो गयी। अब पहलवान भी वहां पहुँच गया और ईश्वर का नाम लेकर उसने तार पर चलना प्राम्भ कर दिया।

भीड़ की आँखे उस पहलवान की तरफ ही लगी हुई थी। सबकी सांसे थम सी गयी थी। हर कोई एक टक पहलवान को Niagara Falls को कौशलपूर्वक पार करते हुए देख रहा था। पहलवान धीरे-धीरे चलकर Niagara Falls को कुशलता से पार कर गया। ज्योंही पहलवान उस पार पहुंचा, वहां तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी, भीड़ उसकी प्रशंसा में जोर-जोर से चिल्ला रही थी। बहुतों ने उसको प्रशंसा स्वरूप ईनाम भी दिया। उस समय उसने ईश्वर का धन्यवाद दिया और भीड़ से पूछा, “क्या आपने मुझे तार पर चलकर Niagara Falls को पार करते देखा ?” भीड़ ने उत्तर दिया- “हाँ”

उसने दूसरा प्रश्न किया, “क्या मैं फिर इस तरफ से उस तरफ तक इसी प्रकार से Niagara Falls को पार कर सकता हूँ?” भीड़ ने फिर से उत्तर दिया- “हाँ”

उसने तीसरा प्रश्न किया, “क्या आप लोगों में से कोई मेरे कंधे पर बैठ सकता है, जब मैं इस झरने को पार करूँ?”

इस प्रश्न पर वहां जमा लोगों में सन्नाटा छा गया। कोई भी उसके कंधे पर बैठकर Niagara Falls को पार करने के लिए तैयार नहीं हुआ। फिर उसने अपने 16 वर्षीय इकलोते बेटे को कंधे पर बैठने को कहा। पिता के कहने पर पुत्र कंधे पर बैठ गया। अब पहलवान ने धीरे-धीरे तार पर चलना प्रारंभ किया।

भीड़ की आँखे उनकी और लगी हुई थी। लोग कह रहे थे, “ये पहलवान पागल हो गया है, अपने साथ-साथ अपने बच्चे की जान भी खतरे में डाल रहा है, अभी दोनों गिरते हैं, अब मरे इत्यादि इत्यादि।” परन्तु ईश्वर की कृपा से पहलवान अपने पुत्र सहित सरलता से Niagara Falls को पार कर गया।

भीड़ ने इस बार पहले से अधिक उसकी प्रंशसा की और बहुत से ईनाम दिए। अब उसने वहां उपस्थित लोगों के सामने ईश्वर की महिमा पर छोटा सा भाषण दिया। उसने कहा, “आप लोगों को मेरी योग्यता पर विश्वास नहीं था। इस कारण आप लोगों में से कोई मेरे कन्धे पर बैठने को
तैयार नहीं हुआ। लेकिन मेरे पुत्र को मुझ पर विश्वास था और इस कारण वह मेरे कन्धे पर बैठने को राजी हो गया और मैं इसे अपने कंधे पर बैठाकर इस पार सकुशल ले आया।”

हम सबका पिता ईश्वर है। जिस प्रकार से मेरे बेटे को मुझ पर विश्वास था और वो बिना किसी संदेह के मेरे कंधे पर इस Niagara Falls को पार करने के लिए बैठ गया। यदि आपका विश्वास भी उस परम पिता परमेश्वर पर हो, तो आप सांसारिक कठिनाइयों से ठीक इसी प्रकार पार पा सकते हो, जैसे मेरे बेटे ने मेरे कन्धों पर Niagara Falls पार किया है। ईश्वर पर दृढ विश्वास रखिये और परिश्रम करिए। मुझे ईश्वर पर दृढ विश्वास था कि वह मेरी इस कठिनाई के समय सहायता करेगा और उसने सहायता की।”

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