Hindi Motivational Story | आत्मविश्वास के बल पर जीती हारी बाज़ी…

Hindi Motivational Story | आत्मविश्वास के बल पर जीती हारी बाज़ी

आत्मविश्वास के बल पर हम अपनी हारी हुई बाजी को भी जीत सकते हैं। लगातार हार का सामना करने के कारण कई बार हमारा आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है और हम अपने आप को हारा हुआ मान लेते हैं, लेकिन ऐसे समय में हम यदि अपने आत्मविश्वास को मजबूत कर लें तो कैसी भी परिस्थिति से आसानी से बाहर आ सकते हैं। पढ़िए डेविड की कहानी हिंदी में……

आत्मविश्वास के बल पर जीती हारी बाजी

डेविड आज पूरी रात सो नहीं सका। रात करवटों में ही कब बीत गई, उसे एहसास ही नहीं हुआ। सुबह उठकर वो घर से बाहर निकल गया।

सुबह का मौसम बहुत सुहाना था। सूरज की रोशनी खिलने का आगाज़ कर चुकी थी। पक्षियों की चह-चहाहट वातावरण को खुशनुमा बना रही थी। पर आज डेविड को कहाँ कुछ दिखाई और सुनाई दे रहा था। वो तो अपने ख्यालों में खोया बस चला जा रहा था। चलते चलते वो एक पार्क में पहुँच गया। पार्क में कुछ बच्चे झूलों पर पहले झूलने की होड़ लगा रहे थे तो कुछ अपने पसंदीदा खेलों में मस्त थे, कुछ बुजुर्ग अलग-अलग झुण्ड बनाकर ठहाके लगा रहे थे तो कुछ लोग jogging कर सेहत बना रहे थे।

डेविड की नजरों ने उस पार्क का जल्दी से मुआयना किया और एकांत देखकर एक बेंच पर जाकर बैठ गया। पिछले एक साल की यादें उसके जेहन में बार-बार दस्तक दे रही थी, सभी कुछ उसकी आँखों के सामने आने लगा। कितना खुश था वह? आखिरकार कई वर्षों की  मेहनत से इकठ्ठा हुई उसकी जमापूँजी और अपने दोस्तों व रिश्तेदारों से कुछ पैसा उधार लेकर जमा हुई राशि से डेविड अपना खुद का business start कर रहा था। वह हमेशा से अपना खुद का business करना चाहता था लेकिन कोई न कोई अड़चन हमेशा उसकी इस इच्छा पर पानी फेर देती थी और वह अपना मन मसोस कर रह जाता था। लेकिन आज ऐसा नहीं था क्योंकि आज तो उसने अपना business का मुहूर्त कर दिया है। आज उसका दिल कुलांचे मार रहा था, उसकी ख़ुशी सातवें आसमान पर थी, पर इन खुशियों के बीच मन में एक आशंका ने भी जगह बना रखी थी “कहीं मैं असफल तो नहीं हो जाऊंगा?”

Hindi Motivational Story – सफल होने के लिए डेविड ने की खूब मेहनत:

उसने अपने business की सफलता के लिए खूब मेहनत की, दिन-रात एक कर दिया। न उसे खाने की चिंता रहती, ना सोने की, वो तो बस business को सफल बनाने में पागलों की भांति काम करता रहा। अपने सामने आने वाली हर चुनौती का डटकर सामना किया, उनसे लड़ा, कभी जीता-कभी हारा। लेकिन पिछली रात सबकुछ खत्म हो गया, डेविड हिम्मत हार गया। उसके सपनों ने दम तोड़ दिया, उसकी उम्मीदें खत्म हो गयीं क्योंकि अपने business में चलते लगातार घाटे के कारण ना सिर्फ वो अपनी जमा पूंजी बल्कि दोस्तों, रिश्तेदारों से लिया पैसा भी खत्म कर चुका था। उसकी देनदारियां बहुत बढ़ चुकी थीं, उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि इतना पैसा वो आखिर कैसे चुका पायेगा ? उसे आज महसूस हो रहा था कि उसके मन में जो आशंका थी वही सच साबित हुई?

डेविड परेशान था, कुछ निर्णय नहीं ले पा रहा था। तभी बेंच पर बैठे-बैठे अचानक उसके चेहरे के भाव कठोर होने लगे। लगता है उसने कोई मन बना लिया है। हाँ, उसे लगने लगा है कि उसकी सारी परेशानियों का एक ही इलाज है, वह अपने जीवन को समाप्त कर लेना चाहता है। उसने आत्महत्या करने का मन पूरी तरह से बना लिया है।

वह आत्महत्या का पक्का इरादा कर बेंच पर से उठता है, तभी उसे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस होता है। डेविड पीछे मुड़कर देखता है तो एक बुजुर्ग सा व्यक्ति उसके पीछे हँसते हुए दिखाई देता है। वह व्यक्ति उससे कहता है,”अरे तू क्यूँ इतना परेशान हैं, ये ले 10 लाख रुपये का cheque और जा अपनी सारी समस्याओं को सुलझा ले।”डेविड उस बुजुर्ग से कहता है,”बाबा, मुझे पैसों की जरूरत तो है लेकिन इतने पैसे मैं आपको वापस कैसे चूका पाउँगा ?”

वह व्यक्ति उससे कहता है,” अरे तू मस्त रह, जब तेरे पास हो तब लौटा देना।” और यह कहकर वह व्यक्ति वहाँ से निकल जाता है।

डेविड हक्का-बक्का सा उसे जाते हुए देखता रह जाता है।

Hindi Motivational Story – डेविड हो जाता है उत्साहित 

अपने हाथ में 10 लाख का cheque देखकर डेविड उत्साह से भर जाता है। वो ईश्वर को धन्यवाद् देते हुए अपने घर की और रवाना हो जाता है। अब उसकी सोच प्रक्रिया बदल चुकी है, वह सोच रहा है जब एक अनजान आदमी मुझ पर विश्वास करके मुझे इतनी बड़ी रकम दे सकता है तो आखिर मैं कैसे अपने ऊपर विश्वास खो सकता हूँ ? डेविड का खोया हुआ आत्म-विश्वास उसे वापस मिल जाता है। डेविड प्रण करता है,“अब मैं और अधिक उत्साह से मेहनत करूँगा और इस बार सफल होकर रहूँगा।”

6 महीने बाद डेविड 10 लाख का cheque लेकर फिर से उसी पार्क में जाता है। वहां उसकी नज़रें उन्ही बुजुर्ग को तलाश करती है, जिन्होंने उसे cheque दिया था। वो उनके बारे में पार्क में घूम रहे लोगों से पूछताछ करता है। वह लोगों को बताता है कि करीब 6 महीने पहले एक बुजुर्ग ने business करने के लिए मुझ पर विश्वास करके 10 लाख का cheque दिया था और आज मैं उनका cheque लौटाने आया हूँ। मुझे उन्हें बताना है कि मुझे उनके दिए हुए इस cheque की जरूरत ही नहीं पड़ी। उनके दिए हुए उत्साह और विश्वास ने ही मेरे अन्दर उर्जा का संचार कर दिया और मेरे आत्मविश्वास को इतना बढ़ा दिया कि मैं अपने business को घाटे से उभारकर आज उसे फायदे में ले आया हूँ।

उन लोगों में से एक व्यक्ति उसके पास आकर बोला तुम जिस बुजुर्ग की बात कर रहे हो, वो पागलखाने से भाग कर आया था। उसके हाथ में कहीं से एक cheque book लग गयी और वो 3 दिन तक यहाँ पार्क में आकर लोगों को ऐसे ही cheque बांटता रहा। बाद में पागलखाने वाले यहाँ आकर उसे अपने साथ ले गए।

डेविड वापस अपने घर आ गया। उसे समझ आ गया था कि उसे सफलता अपने उत्साह, लगन, मेहनत और सबसे जरूरी खुद पर विश्वास, अपने आत्मविश्वास से हासिल हुई है।

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