Story in hindi (हिंदी कहानी) – शेर के बाल से पति का इलाज

Story in Hindi:शेर के बाल से पति का इलाज एक बार एक भीषण युद्ध हुआ। युद्ध समाप्त होने के बाद उसकी भयावहता की यादें अपने साथ लिए सभी जिन्दा बच गए लोग अपने अपने घर लौट गए। इस युद्ध से लौटने के बाद लक्ष्मी का पति बिलकुल बदल गया था। युद्ध की भयावहता ने उसके दिलो-दिमाग पर बहुत गहरा असर किया और उसके मिजाज़ को बहुत बदल दिया था। अब वह हमेशा गुमसुम रहता और बात-बात पर गुस्सा करने लगता। उसका स्वभाव ऐसा हो गया था कि लक्ष्मी को उससे डर लगने लगा था। पति की ऐसी हालात देखकर उसे पति के स्वास्थ्य की चिंता होने लगी। किसी ने उसे एक अच्छे वैद्य के बारे में बताया औ … [Read more...]

Do not be jealous | ईर्ष्या खुद के लिए ही नुकसानदायक

Hindi Moral Story - Do not be jealous ये काफी समय पहले की बात है। एक गांव में ईर्ष्यालु प्रवत्ति का एक किसान रहता था। वह बहुत गरीब था, अपनी आजीविका चलाने के लिए उसके पास एक बहुत छोटा सा खेत था। उस खेत में कुछ अनाज व सब्जियां उगाकर वह अपना व परिवार का पालन-पोषण करता था। इससे बड़ी मुश्किल से ही उसका गुजर -बसर हो पाता था। गरीबी के कारण उसके पास धन की हमेशा कमी बनी रहती थी। अपने ईर्ष्यालु स्वभाव के कारण उसकी अपने पडोसियों और रिश्तेदारों से भी बिलकुल नहीं बनती थी। समय के साथ किसान की उम्र ढलने लगी, अब उससे मेहनत का काम नहीं हो पाता था। उसे खेत पर … [Read more...]

Most Important body part | शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग

Our most important body part: बचपन से मेरी माँ अक्सर मुझसे एक सवाल किया करती थी कि हमारे शरीर का most important body part कौनसा है? उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर मैंने इस सवाल के अलग-अलग जवाब दिए और हेमशा यही माना कि मैं सही जवाब दे रहा हूँ। जब मैं छोटा था तो मुझे लगता था as a human आवाज़ हमारे लिए बहुत important है क्योकि आवाज़ सुनकर ही हम बोलना सीखते हैं।इसलिए मैं जवाब देता, "माँ, हमारे कान हमारी body का  बहुत important अंग है।" माँ कहती,"नहीं, इस दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो deaf हैं और बिना आवाज़ सुने भी अपने काम करते हैं इसलिए कान इ … [Read more...]

Story in Hindi (एक छोटी से अच्छी कहानी) – गधा और मज़ार

Story in Hindi - गधा और मज़ार क्या आप भी इच्छाओं की पूर्ती के लिए कहीं भी माथा टेक देते हैं ? विडम्बना है कि आज समाज में अंधानुकरण व अन्धानुगमन की परंपरा चल पड़ी है। अधिकतर लोग ईश्वर और ईश्वर संबंधित तथ्यों पर आँख मूँद कर विश्वास करते हैं। अपने विवेक या बुद्धि का उपयोग ही नहीं करते हैं। विडम्बना है कि आज समाज में अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए मानव कहीं भी माथा टेकने को गुरेज नहीं करता है। ऐसी ही एक कहानी जो मैंने कभी अपने पिताजी से सुनी थी आज कहीं पढ़ने को मिल गयी तो सोचा क्यों न इसे अपने blog पर भी post किया जाए। किसी मजार पर एक फ़क़ीर रहत … [Read more...]