Most Important body part | शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग

Our most important body part: बचपन से मेरी माँ अक्सर मुझसे एक सवाल किया करती थी कि हमारे शरीर का most important body part कौनसा है? उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर मैंने इस सवाल के अलग-अलग जवाब दिए और हेमशा यही माना कि मैं सही जवाब दे रहा हूँ। जब मैं छोटा था तो मुझे लगता था as a human आवाज़ हमारे लिए बहुत important है क्योकि आवाज़ सुनकर ही हम बोलना सीखते हैं।इसलिए मैं जवाब देता, "माँ, हमारे कान हमारी body का  बहुत important अंग है।" माँ कहती,"नहीं, इस दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो deaf हैं और बिना आवाज़ सुने भी अपने काम करते हैं इसलिए कान इ … [Read more...]

अकबर बीरबल की कहानी – बच्चों को धैर्य से समझाएं

Akbar Birbal story in hindi (अकबर बीरबल की कहानी): आजकल लोगों में धैर्य की मात्रा बहुत कम होती जा रही है। जिसका खामियाज़ा कई बार हमारे बच्चों को भुगतना पड़ता है। हम बाहर की परेशानी घर लेकर आते हैं और फिर बच्चों की कोई जिद या बाल सुलभ सवाल पूछने की आदत से परेशान होकर उन्हें डांट-डपट देते हैं या कई बार हाथ भी उठा लेते हैं। कई बार बच्चों की जिद पर धैर्य बनाये रखना कितना मुश्किल हो जाता है, इसी को इंगित करती अकबर बीरबल की कहानी जरूर पढ़ें। एक दिन की बात है - बीरबल दरबार में काफी देरी से पहुँचा। जब बादशाह अकबर ने उससे देरी से आने का कार … [Read more...]

संत का ज्ञान : मोह या आसक्ति रखना उचित नहीं

Saint Francis संत का ज्ञान - मोह या आसक्ति रखना उचित नहीं: एक बार Saint Francis संत फ्रांसिस के पास एक युवक उनसे मिलने आया। संत ने उससे पूछा, “कहो पुत्र, कैसे हो, क्या हालचाल हैं तुम्हारे?” युवक बोला, “स्वामी आपके आशीर्वाद और ईश्वर की दया से मैं बहुत अच्छे से हूँ, मेरा पूरा परिवार मेरा बहुत ख्याल रखता है, वे सब मुझे बहुत चाहते हैं। मैं अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली मानता हूँ, जो मुझे इतना प्यार करने वाला परिवार मिला, मुझे उन पर गर्व है।” संत बोले, “ पुत्र, तुम्हे अपने परिवार पर इतना गर्व नहीं करना चाहिए। इस दुनिया में अपना कोई नहीं होता। जहा … [Read more...]

Story in Hindi (एक छोटी से अच्छी कहानी) – गधा और मज़ार

Story in Hindi - गधा और मज़ार क्या आप भी इच्छाओं की पूर्ती के लिए कहीं भी माथा टेक देते हैं ? विडम्बना है कि आज समाज में अंधानुकरण व अन्धानुगमन की परंपरा चल पड़ी है। अधिकतर लोग ईश्वर और ईश्वर संबंधित तथ्यों पर आँख मूँद कर विश्वास करते हैं। अपने विवेक या बुद्धि का उपयोग ही नहीं करते हैं। विडम्बना है कि आज समाज में अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए मानव कहीं भी माथा टेकने को गुरेज नहीं करता है। ऐसी ही एक कहानी जो मैंने कभी अपने पिताजी से सुनी थी आज कहीं पढ़ने को मिल गयी तो सोचा क्यों न इसे अपने blog पर भी post किया जाए। किसी मजार पर एक फ़क़ीर रहत … [Read more...]