Don’t be like Nikola Kalinic | कैसे बन गया एक फुटबॉलर लोगों के उपहास का पात्र !!!

Don’t be like Nikola Kalinic | कैसे बन गया एक फुटबॉलर लोगों के उपहास का पात्र !!!

“Don’t be like Nikola Kalinic” ये hashtag आजकल internet पर खूब चल रहा है। Croatia football team के supporters इस hashtag के साथ आपको ये सलाह दे रहे हैं कि “Don’t be like Nikola Kalinic” मतलब “Nikola Kalinic की तरह ना बनें।” हिंदी पाठक भी जरूर इस बात को जानना चाहेंगे कि ये Nikola Kalinic है कौन ? और क्यों Croatia football team के supporters उसकी तरह नहीं बनने की सलाह दे रहे हैं?

चलिए तो हम आपको इस गुस्से और अहम् की सच्ची कहानी का पूरा ब्यौरा दे दते हैं।

Don't be like Nikola Kalinic

Croatia football team का आकलन एक कमजोर टीम के तौर पर किया गया था। Football के जानकार और supporters इसके first round में ही बाहर हो जाने की बात कर रहे थे। लेकिन Croatia football team के players ने अपने शानदार खेल, जिजिविशा और जीतने की जिद के चलते football जगत की कई बड़ी teams को हराया और finals में जगह बना ली है।

Croatia football team इस विश्व कप में केवल दो natural strikers के साथ ही आया था। Mario Mandzukic (मारियो मंडज़ुकिक), जिसने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में विजेता गोल दागा था। दूसरा था Nikola Kalinic (निकोला कालिनिक)। नाइजीरिया के खिलाफ क्रोएशिया ने अपने पहले गेम में Nikola Kalinic को बेंच पर रखा था। Croatia इस गेम में नाइजीरिया से 2-0 से आगे चल रहा था, तभी मैच के अंतिम छड़ों में कोच ने Nikola Kalinic को तैयार रहने को कहा, जिससे वो इन अंतिम छड़ों में अपने प्रदर्शन से टीम का उत्साह और बढ़ा सके।

गुस्सा आने पर हम चिल्लाते क्यों है? 

इतनी देर तक बेंच पर छोड़े जाने के विरोध में, Nikola Kalinic ने गुस्से में खेलने से इनकार कर दिया। उसने अपनी कमर में दर्द का बहाना बनाया और कोच से कहा कि वो मैच नहीं खेल पायेगा और कोच उसकी जगह किसी और को मैच में भेज दे।

Nikola Kalinic अपने आप को Croatia football team के शीर्ष खिलाड़ी के रूप में देखता था और कोच द्वारा मैच के केवल कुछ अंतिम छड़ों के लिए भेजा जाना उसे रास नहीं आया। इसलिए उसने मना कर दिया। कोच ने बहस न करते हुए दूसरे खिलाड़ी Pjaca (पजाका) को मैदान में भेज दिया।

मैच के बाद, कोच द्वारा अपने कोचिंग स्टाफ से बात करने पर पता चला कि Nikola Kalinic पूरी तरह से फिट है। कोचिंग स्टाफ द्वारा Nikola Kalinic से अपील भी की गई कि अपनी गलती और अभद्र व्यव्हार के लिए कोच से माफ़ी मांगे। लेकिन कलिनिक ने माफी माँगने से इंकार कर दिया।

अपने अभद्र व्यवहार और टीम भावना का सम्मान ने करने के चलते Croatia football team management ने उसे टीम से बर्खास्त कर दिया, और उसे रूस से वापस घर भेज दिया। Nikola Kalinic घर पहुँच कर छुट्टियां बिताने निकल गया और उसने social media पर खुद की मस्ती करते हुए की बहुत सारी pictures भी पोस्ट की, जिससे लग रहा था कि उसे team से निकाले जाने का बिलकुल भी दुःख नहीं है।

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आखिरकार, वह तो यही कल्पना कर रहा था, Croatia football team टूर्नामेंट में कहीं भी नहीं टिक पाएगी और इस टीम को तो पहले round में ही बाहर हो जाना है। लेकिन Croatia football team ने तो इतिहास रच दिया और उसके बिना ही टीम अपने मैच जीतने में कामयाब रही। आज Croatia football team अपना पहला football finals खेलेगी और इतिहास रचेगी। लेकिन अफ़सोस Nikola Kalinic अपने गुस्से और अहम् के चलते इस इतिहास का हिस्सा नहीं बन पायेगा।

आज क्रोएशिया ने विश्व कप फाइनल में पहुंचने के इतिहास में अपनी सबसे बड़ी फुटबॉल उपलब्धि हासिल की है। शेष 22 खिलाड़ी राष्ट्रीय नायक बन चुके हैं। उनके नाम हमेशा हमेशा के लिए Croatia की पीढ़ियों के दिल में अंकित हो गए हैं। Nikola Kalinic भी इस glory का हिस्सा हो सकता था, लेकिन अपने क्रोध और अहम् के कुछ मिनटों को नहीं संभाल पाने और अपने अहंकार के कारण आज वो एक उपहास मात्र बन कर रह गया है। क्योंकि लोग अब पूरी दुनिया को सलाह दे रहे हैं कि “Don’t be like Nikola Kalinic.”

हो सकता है उसे अब अपनी गलती का एहसास हो रहा हो। “हो सकता” नहीं कहना चाहिए क्योंकि उसे एह्साह हो ही रहा होगा। वह अब अपनी गलती के लिए खेद भी व्यक्त कर सकता है। लेकिन अब क्या फायदा ? अब तो बहुत देर हो चुकी है। जीवन के बारे में ये कहानियां हमारे लिए काफी परिचित हैं, इस तरह की घटनाएँ हमारे आस पास भी घटित होती रहती है। लेकिन क्या हम वास्तव में उनसे सबक सीखते हैं? क्या हम इन्हें अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में गहराई से लागू कर पाते हैं?

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Nikola Kalinic की तरह नहीं बनना चाहते तो अपने क्रोध और अहम् पर काबु करना सीखें। क्रोध के जन्म में कहीं न कहीं अहम् का बहुत बड़ा हाथ है। आप टटोले अपने जीवन को, जैसे ही किसी ने आपके अहम् पर चोट करने वाली बात कही, आप आग-बबूला हो जाते हैं। आप अपना आपा खो देते हैं, कुछ भी गलत-सलत निर्णय ले लेते हैं। जिनके लिए बाद में आपको पछताना भी पड़ता है। इस अहम् पर खुद चोट करना सीखिए, चोट करते रहिये, जब तक कि ये समाप्त नहीं हो जाये। इसके लिए सबसे पहले sorry कहना सीखिए, आपके लगे आपकी गलती नहीं है, तब भी बोलिए।

आपका अहम् और आपका क्रोध आपके जीवन से खुशियों और खुशहाली के कई वर्ष तक छीन सकता है। इसीलिए लोग आज कह रहे हैं, “Don’t be like Nikola Kalinic.”

हमने पहले भी इस ब्लॉग पर गुस्से और अहम् सी जुडी कहानियों का ज़िक्र किया है, जो पुराने समय की कहानियाँ हैं। पर आज की ये कहानी और इसका परिणाम आपके सामने हैं। अब ये आप पर है कि आप अपने जीवन में खुशहाली चाहते हैं या अहम् और क्रोध।

उम्मीद है Don’t be like Nikola Kalinic | गुस्से और अहम् की सच्ची कहानी, आपको पसंद आई होंगी। अगर आप ये कहानी और इसके द्वारा दिए गए सन्देश पर अपना कोई व्यू देना चाहें या ऐसी ही कोई कहानी हमारे साथ शेयर करना चाहे तो comment section के जरिये हमें जरूर इससे अवगत करायें। हमारी मदद करने के लिए इसे Google+facebooktwitter और दूसरे social platform पर अपने मित्रों के साथ share जरूर करें।

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