नए साल के संकल्प:

New Year Resolution:

दोस्तों नया साल आने वाला है,  हम में से बहुत सारे लोगों ने नए साल के लिये कुछ महत्‍वपूर्ण संकल्‍प (New Year Resolution) तैयार कर लिये होगे। कुछ ऐसे भी होंगे जो संकल्प के लिए नए साल का इंतज़ार नहीं करते, जब इच्छा हो जाती है तभी संकल्प ले लेते हैं और कुछ……… कभी संकल्प नहीं लेते, उनके हिसाब से life बिंदास चल रही है, क्यों उसमे resolution की tension मोल ली जाये। ये सभी की अपनी अपनी सोच पर निर्भर करता है कि वो कोई संकल्प ले या न लें।
दोस्तों क्या आपने सोचा है कि आखिर क्यों हमें जरूरत पड़ती है संकल्प लेने की? जवाब बहुत आसान है, क्योंकि हम अपनी ज़िन्दगी के बारे में अच्छा सोचते हैं, इसे और बेहतर बनाना चाहते हैं। आज हम जहाँ भी है, उससे थोड़ा अच्छा होना चाहते हैं, अच्छा करना चाहते हैं। और इसके लिए हम या तो अपनी गलत आदतों को छोड़ने का संकल्प लेते हैं या फिर कुछ अच्छी आदतों को अपनाने का संकल्प लेतें हैं। ऐसी आदतें जिनको छोड़ने या अपनाने से हमें लगता है कि हमारी life बेहतर हो जाएगी। जब इन संकल्पों को निभाने की बात आती है तो जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है, वो है इच्छाशक्ति। इच्छाशक्ति में थोड़ी सी भी कमी हमें हमारे संकल्पों से डिगा सकती है। फिर हम ऐसा क्या करें कि इच्छाशक्ति कमजोर न पड़े, बल्कि और मज़बूत होती जाए।
पहली बात जो ध्यान रखनी है वो ये है कि संकल्प हमारा अपना होना चाहिए, ना कि सिर्फ किसी दूसरे का सुझाया हुआ। दूसरे का सुझाया हुआ संकल्प तभी काम कर सकता है जब हकीकत में वो हमारे दिल को लगे, अन्यथा हम थोड़े दिन की कश्मकश के बाद उस संकल्प को छोड़ देंगे। इसके लिए मैं आपको एक सच्ची घटना बताता हूँ। ये कोई पांच एक साल पहले की बात है। मेरे एक साथी गुटखा बहुत खाते थे, वो मुझसे उम्र में काफी बड़े और senior भी थे, पर फिर भी मैं उन्हें गुटखा छोड़ देने की लिए टोकता रहता था। वो मुझे दिलासा देते कि बस यार ये साल खा लेने दे, नए वर्ष मैं मेरा यही resolution है, मैं गुटखा खाना पक्का छोड़ दूंगा। इसी बीच हमारें यहाँ एक नए trainee ने join किया, जिसे इन्ही गुटखा खाने वाले senior के under में ही दिया गया। मेरे साथ-साथ अब वो trainee  भी उनको गुटखा छोड़ देने के लिए टोकने लगा। पर वो अपने नए साल पर छोड़ देने की बात पर टिके रहे। खैर नया साल भी आ गया और अपने कहे अनुसार उन्होंने गुटखा कम से कम हमारे सामने नहीं खाया। हम खुश हुए कि चलो इनका गुटखा छूट गया पर वो हकीकत नहीं थी क्योंकि थोड़े ही दिनों में उनके हाथ में फिर से गुटखे की पूड़ियाँ थी। जब उनसे हमने पुछा तो तरह-तरहके बहाने, यार काम, घर की इतनी tensions हो जाती है कि खाना ही पड़ता है, सुबह-सुबह प्रेशर नहीं बनता वग़ैरह-वग़ैरह।  अब एक दिन क्या हुआ कि वो site पर उस trainee के साथ round ले रहे थे और उनको गुटखे की तलब हो गयी पर उनके पास गुटखा था नहीं। अब उन्होंने इधर-उधर देखना शुरू किया कि शायद कोई गुटखा खाने वाला दिख जाए, तभी उन्होंने देखा कि site पर काम करने वाला एक worker गुटखे की पुड़िया निकालकर गुटखा खाने की तैयारी कर रहा है, वो तुरंत उसके पास पहुंच गये और उससे बोले अकेले अकेले खायेगा क्या, ला मुझे भी खिला। उस worker ने इनको गुटखे की पूड़ी दे दी और ये तुरंत पूरी पूड़ी गटक गए। जो trainee उनके साथ था, वहाँ से निकलते ही उसने अपना तीर छोड़ दिया और बोला देखो सर, गुटखे की वजह से क्या हालत हो गयी आज आपकी, एक worker के सामने हाथ फ़ैलाने पड़ गए। अब ये बात उनके दिल को चुभ गयी और उन्होंने अपने मुँह का गुटखा थूक दिया और बोले बस आज से, अभी से मैंने गुटखा छोड़ दिया, अब कभी नहीं खाऊंगा। और अपने इस संकल्प को वो आज तक निभा रहें हैं जबकि वो trainee भी यहाँ से जा चूका है।
अब यहाँ तो एक मौका मिल गया और बात बन गयी। पर हमेशा ऐसा हो, ये कोई जरूरी नहीं। इसलिए दूसरे का सुझाया हुआ resolution तभी लें जब आप खुद ये महसूस करें कि मुझे इस कमी को दूर करना है या किसी खूबी को अपनाना है।
जब हम कोई resolution ले लेते हैं तो अब जरूरत पड़ती है उसे निभाने की और निभाने के लिए चाहिए मजबूत इच्छाशक्ति। मान लीजिये किसी ने resolution लिया कि अब वो धुम्रपान (smoking) नहीं करेगा। अब अगर कोई उसके सामने smoking करेगा तो उसके मन में आएगा की चलो यार आज-आज पी लेता हूँ। एक ही तो पियूँगा, एक से क्या फर्क पड़ेगा? मैं तो 20-20 एक दिन में फूंक दिया करता था। इस वक़्त अगर smoking नहीं करने की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ गयी तो फिर ये आदमी अपना resolution नहीं निभा पायेगा, थोड़े ही दिनों में वो पुराने ढर्रे पर होगा।
फिर हम ऐसा क्या करें की हमारी इच्छाशक्ति कमजोर ना पड़े। इसके लिए हमें हमारे resolution को जीना पड़ेगा। हमें हर पल ये याद रखना होगा की वो resolution हमने हमारी ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए लिया है। धुम्रपान छोड़ने के ही resolution को अगर देखें तो हम ये सोच सकते हैं कि अब हम ज्यादा सेहतमंद रहेंगे, हमारी वजह से आस-पास के लोगों को smoke से जो दिक्कत होती थी अब वो नहो होगी, cancer के एक कारण को मैंने हमेशा के लिए छोड़ दिया। smoking छोड़ने से अगर 1000 रूपये महीने के भी बच रहें है तो उसके बारे में सोच सकते है, मैं अपनी family के साथ outing पर जाऊंगा या अपनी savings बढ़ाऊंगा या किसी जरूरतमंद बच्चे की पढाई के लिए दूंगा या किसी NGO को दूंगा। अब smoking छोड़ते वक़्त अगर आप इन सब बातों को आत्मसात कर लेते हैं, अपने मन के भीतर तक उतार लेते हैं तो आपकी इच्छाशक्ति इतनी प्रबल हो जाएगी कि जैसे ही किसी को देख कर आपकी इच्छा smoking करने की होगी, आपका अंतरमन आपको वो सब दिखायेगा जो आप smoking छोड़ते वक़्त आत्मसात कर चुके हो और आपकी इच्छा अपने आप ही अनिच्छा में तब्दील हो जाएगी।
यहाँ resolution को जीने से मेरा मतलब है कि smoking छोड़ते वक़्त जो बेहतर life की कल्पना करके हमने smoking छोड़ी है, उस बेहतर life को जागती आँखों से रोजाना सोचना है, उसकी pictures अपने दिमाग को हर रोज दिखानी है। ऐसा करने से हमारा मन इस resolution को आत्मसात कर लेगा और फिर इसे छोड़ने में शुरुवाती दिनों की दिक्कत के बाद कोई समस्या नहीं आएगी।
 मैं यहाँ आपको कुछ resolution सुझाने की गुस्ताखी कर रहा हूँ पर इनमे से वही अपनाएं जिन्हें आप आत्मसात कर सकें, निभा सकें।
1. परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताए: आपने ये बात कईयों से सुनी होगी “कर्म ही पूजा है” अब इसमें कर्म आपको office में करना है और पूजा अपने परिवार के साथ घर में। काम करना अच्छी बात है पर उसे जीवन बना लेना कतई सही नहीं है, इसलिए इस वर्ष से अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताये, उनके साथ घूमने-फिरने का plan बनायें, दोस्तों के साथ मिलने का plan बनायें।
2. कहते हैं “सेहत लाख नियामत”: आजकल 25-30 की उम्र में भी लोगों को heart attack आ जाता है, मेरे 2 साथियों को 30 की उम्र में heart attack आ गया, दोनों को एंजियोप्लास्टी करानी पड़ी। अपनी सेहत का ज्यादा ध्यान रखने का resolution लें। हर साल complete medical check-up नहीं करा सकते तो 2-3 साल में एक बार जरूर करा लें।
3. तम्बाकू, गुटखा, धुम्रपान, शराब हमेशा के लिए छोड़ दीजिये. ये कई घरों की बर्बादी का कारण हैं।
4. इस साल प्रण करें की महिलाओं और बच्चियों का सम्मान करेंगे। उन्हें ना तो परेशान करेंगे और ना किसी को करने देंगे।
5. कम से कम एक जरूरतमंद की मदद जरूर करेंगे।
6. अपनी ज़िन्दगी में तनाव को नहीं आने देंगे और हँसते-खेलते ज़िन्दगी बिताएंगे। हमेशा खुश रहेंगे।
7. अपनी किसी इच्छा को अगर पूरा नहीं कर पा रहें हैं तो इस साल उसे पूरा करने की हर संभव कोशिश करेंगे।
8. जब हम कुछ नया सीखते हैं तो हमारे दिमाग की activeness बढ़ जाती है, इसलिए इस साल कुछ नया सीखें . जैसे की कोई music instrument, dance, language, swimming, अपनी job या business से related कोई skill या ऐसा ही कुछ और जो आपको ख़ुशी दे सके।

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Comments

  1. बहुत अच्छी सलाह दी है आदिल जी आपने.

    अनिल साहू

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