तनाव से मुक्ति कैसे पाएं

How to reduce stress in Hindi (तनाव कम कैसे करें):

दोस्तो! आज जिस एक समस्या से सबसे ज्यादा लोग परेशान हैं वो है तनाव (stress, tension). यह आज की एक हक़ीक़त है कि हर इंसान अपने जीवन में किसी ना किसी तरह का तनाव या तो झेल चुका है या फिर अभी भी झेल रहा है। यह Stress कई कारणो से हो सकता हैं जैसे नौकरी की चिंता, परिवार – दोस्तों या रिश्तेदारों से अनबन, carrier growth की चिंता, धन-संपत्ति की कमी, business का ढंग से नहीं चलना आदि आदि। ऐसी कोई भी situation जो हमारे चेहरे से हंसी, मुस्कान छीन ले, आपके चेहरे पर चिंता की लकीरें छोड़ दे, उसे stress कह सकते हैं। अगर हमने इस stress का सही तरीके से सामना नहीं किया तो इसके कई बुरे परिणाम भी हो सकते हैं। ये stress शरीर के किस हिस्से या अंग पर कुप्रभाव डालेगा ये हमें बहुत बाद में पता चलता है। मैं आपको इसका एक उदाहरण देता हूँ।

अभी कुछ समय पहले मेरी ज़िन्दगी बहुत stress से गुजर रही थी, मैंने जो ऊपर कारण गिनायें हैं इनमे से कोई एक नहीं बल्कि इन सभी कारणों से मैं एक साथ जूझ रहा था। पर मैं बाहरी तौर पर इसे stress की तरह feel नहीं करता था। ऐसे लगता था जैसे की ये सब तो part of life है, सब के साथ होता है। और इन्हीं सब के बीच मेरा पेट ख़राब रहने लगा। मुझे कुछ भी खाना-पीना अच्छा नहीं लगता, पेट हमेशा भारी-भारी रहता। अब पेट खराब हुआ तो एक doctor को दिखा दिया, कुछ दिन उसका इलाज़ कराया पर कोई फायदा नहीं। doctor change किया, किसी दूसरे को दिखाया उसकी दवाइयाँ लीं पर यहाँ भी कोई फायदा नहीं। ऐसा करके मैंने 5 doctor बदल दिए पर किसी से कोई फायदा नहीं हो रहा था। एक तो मैं पैसों की तंगी से वैसे ही जूझ रहा था ऊपर से ये फालतू खर्च और तंग किये हुए था। तो मैंने इलाज़ कराना ही छोड़ दिया। 

कुछ दिनों बाद मेरे हाथ में अखबार के साथ आया हुआ एक template पड़ा, वो एक hospital का ad था जिसने अपने यहाँ psychiatrist की सेवाएं शुरू की थी। उसने template में बहुत सारे symptoms बताय थे जो stress की वजह से हो सकते थे। उनमें से कुछ symptoms मुझे मेरे अंदर भी महसूस हुए। पेट ख़राब होने का symptom भी उसमे था पर फ़िलहाल मेरा दिमाग उस पर नहीं गया क्योंकि उसमे ऐसे और भी बहुत सारे symptoms थे जो मैं अपने शरीर में महसूस करता था और इस template को देखने के बाद मैंने पहली बार अपने आप से सवाल किया, क्या मैं stress में हूँ ? 

मैंने wife से इस बारे में बात की और finally अपना इलाज़ कराने का decide किया। एक महीने से भी ज्यादा इलाज़ कराने के बाद मैंने इसे बंद कर दिया, जिन्होंने भी psychiatrist से कभी इलाज़ कराया होगा उन्हें पता होगा कि उनकी दवाओं के असर के कारण आप दिनभर नींद में ही रहते हो, दिन भर उबासियाँ आती रहती है, सोते रहने का मन करता है। इसलिए जब मुझे लगने लगा कि मैं पहले से better feel कर रहा हूँ तो मैंने दवा लेनी बंद कर दी। वैसे भी दवाओं से आप जितना दूर रहो उतना ही अच्छा है। इसके कुछ दिनों बाद अचानक एक दिन मैंने realize किया कि कुछ दिनों से मेरा पेट सही है। उसी समय मुझे ये click हो गया कि इसका मतलब stress के वजह से मेरा पेट ख़राब था दूसरे doctor सिर्फ पेट सही होने की दवा दे रहे थे जबकि इसका root cause कुछ अलग था। दोस्तों stress ने मेरे तो पेट पर असर डाला लेकिन ये शरीर में कहीं भी अपना effect डाल सकता है जैसे कि हो सकता है याददाश्त कमजोर हो जाये, भूलने की बीमारी हो जाये, आदमी पागल भी हो सकता है, कान से आवाजें आना, कमर में दर्द रहना, दिल की बीमारियां, बालों का झड़ना या समय से पहले सफ़ेद होना आदि आदि। और भी बहुत सारी बीमारियाँ इस stress की वजह से हो सकती है और इसीलिए बड़े -बुजुर्गों ने कहा है चिता मुर्दे को जलाती है जबकि चिंता ज़िन्दे को ही जला देती है।  

psychiatrist के अलावा और मैंने क्या किया इस नामुराद stress से निज़ात पाने के लिए, वो मैं आपको यहाँ बताऊंगा। आप भी इन नुस्खों को आजमा सकते हैं शायद ये आप पर भी काम कर जाएँ : 

1. नींद :

इस मामले में ईश्वर का मुझ पर करम है कि मैं भले ही कितने भी stress या tension में रहा, लेकिन बात जब सोने की हो तो मैं अपने दिमाग को divert कर लेता हूँ और सुकून की नीद सोता हूँ फिर सुबह से भले ही मैं वापस से stress में चला जाता पर नींद मैंने हमेशा पूरी की और शायद यही वजह भी रही की मैं पागल होने से बच गया। क्योंकि 7 – 8 घंटे की नींद आपके दिमाग को इतना relax कर देती है की दिमाग फिर 16 घंटे stress झेल सके। दिमाग divert करने का मेरा जो तरीका है वो है बिस्तर पर लेटते ही, जैसे ही दिमाग मुझे tension की तरफ ले जाता, मैं उसे ऐसी दुनिया से जोड़ देता जो हकीकत से परे है। मतलब ऐसी दुनिया जहाँ सबकुछ मेरे हिसाब से होता है, मेरे पास जादुई ताकतें हैं like शक्तिमान, spiderman, superman या इनसे भी ज्यादा ताकतवर और फिर मैं अपने आस-पास घटने वाली बुराइयों को अपनी जादुई शक्तियों से खत्म करता। Science भी इस बात को prove कर चुकी है कि जब इंसान इस तरह के पूर्ण रूप से काल्पनिक सपने देखता हैं तो दिमाग relax mode में जाने लगता है और नींद आ जाती है। इसके लिए आप भी अपने आस-पास के माहौल से ही कुछ ऐसा ढूंढिए जो आपको लगता है कि गलत है फिर अपने सपने में सोचिये की उस गलत को सही करने की सारी ताकतें आपको मिल गयीं है और फिर सपने में देखिये कि आप उन ताकतों का इस्तेमाल करके कैसे सबकुछ सही कर रहें है।  जहाँ तक नींद के घण्टे का सवाल है तो ये हमारे शरीर,उम्र, स्वास्थ्य के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। मेरे लिए 7-7.5 घण्टे काफी हैं, इससे कम या ज्यादा, दोनों ही conditions में मेरा दिन आलस में ही गुजरता है।

2. Stress

Stress के बारे में सोचना ही छोड़ दिया : मैंने सोच लिया मुझे खुश रहना है और इसके लिए मैंने resist करना छोड़ दिया। मैंने decide किया कि अब अपनी ज़िन्दगी का बहाव situations के हिसाब से मोड़ दूंगा और कुछ भी resist नहीं करूंगा। जो रिश्ते नाते खुशियों में दखल दे रहे थे, जिन्हे में पिछले कुछ वर्षों से घसीट रहा था, उन्हें अब छूट जाने दिया। दोस्तों ने साथ छोड़ा तो भी दुखी नहीं हुआ, उन्हें भी छोड़ दिया। पैसों का नुक़सान हो रहा था, हो जाने दिया और भी बहुत कुछ हो रहा था सब हो जाने दिया, कुछ भी resist नहीं किया। उपरवाले से ये भी पूछना छोड़ दिया कि ये सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है ? मैंने तो किसी का कभी कुछ बिगाड़ा नहीं। मन को शांत कर लिया कि जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है इसलिए इसे हो जाने दो, मुझे तो खुश रहना है। खुश रहने के लिए मैंने जो रास्ता चुना वो था परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना। अब मैं office से time पर घर आता और अपने बच्चों के साथ खूब हँसता-खेलता हूँ। office में भी अकेला रहने के बजाय अपने साथियों के साथ field में ज्यादा समय बिताता। उनके साथ भी वही हंसी-मजाक की बातें करता। नौकरी की tension, career growth की tension सब दिमाग से निकाल दी और ऐसा करने से मेरे अन्दर और आस-पास जो negative energy इकठ्ठा हो गयी थी, उसकी layers टूटने लगी। अब मेरे अंदर positivity के अंकुर फूटने लगे। मैं अपनी पिछले कुछ वर्षों की परेशानियो, असफलताओ से बाहर आने लगा। चेहरे से जो हंसी गायब हो गयी थी वो वापस लौटने लगी।  

मैंने ये ख़ुशी अपने बच्चों की मदद से हासिल की। आप कोई दूसरा तरीका आजमा सकते हैं like आप अपनी hobby को पूरा करने में समय बिताये, दोस्तों के साथ गप-शप करें, अच्छी books पढ़िए, अच्छे article पढ़िए, योगा, मैडिटेशन कर सकते हैं, धार्मिक स्थलों पर जा सकते हैं, कहीं घूमने जा सकते हैं या ऐसा कोई भी काम जिसको करने से आप ये सोचते हैं आपको खुशी हासिल होगी आप वो करें और ऐसे समय में अकेले बिलकुल भी ना रहें। हमेशा ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपको tension देने के बजाय खुश रख सकते हों। लेकिन सब कुछ एक साथ करने की कोशिश मत करिए, कोई भी ऐसी 2-3 चीजें ही करिए, जिनके बारे में आपको लगता है ऐसा करने से आपको खुशी मिलेगी और आप उसे लगातार कर भी सकते है। और हाँ अपने दिमाग को ये बात बार-बार याद दिलाते रहें कि आप बहुत खुश हैं।  

3. चिल्लाइये:

मैंने इसे आजमाया है। मैं जिस site पर job करता हूँ वहाँ इतना शोर है कि पास में खड़ा व्यक्ति जोर से चिल्लाये तो भी उसकी बात ढंग से समझ में नहीं आती और इसका मैंने फायदा उठाया। इस सारे process में जब भी कभी अपने आप को थोडा down feel करता, मैं site पर जाता और वहाँ एकांत में खड़े होकर अपने शरीर का पूरा जोर लगा कर चिल्लाता, जोर-जोर से कहता कि मैं बहुत खुश हूँ और ऐसा करने से मेरे अन्दर की negativity बाहर आ जाती और मैं better feel करने लगता। मैंने इसे एक दूसरे तरीके से भी आजमाया। शांत जगह पर बैठ जाता और अपने मन में उतनी ही जोर से चिल्लाता, जितनी जोर से site पर चिल्लाता लेकिन इसमें आवाज बाहर नहीं सुनाई देती, पर ये भी उतना ही कारगर है।

4. हंसने में कोई कंजूसी नहीं :

हँसना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है। अगर आप खुल के हंस सकते हैं तो याद रखिये तनाव आपको छू भी नहीं सकता। खुल के हँसना तनाव को जीवन से भगाने का एक बेहतर तरीका है। क्योंकि जब हम हँसना भूल जाते हैं तो तनाव को हम पर हावी होने का मौका मिल जाता है। इसलिए हंसने का कोई भी मौका ना गंवाएं, इसके लिए दोस्तों के साथ गप-शप करें, comedy movies देखें, comedy shows देखें, comedy nights with Kapil देखें। जब भी हँसे दिल से हँसे, दिखावे के लिए ना हसें, उससे कोई फायदा नहीं होगा।

इन तरीकों को आजमाने से पहले मैं आपको एक सलाह जरूर दूंगा कि आपको अपने दिल को एक बात समझानी ही पड़ेगी कि जो हो चुका है फिलहाल उसको बदला नहीं जा सकता। फिर चाहें वो रिश्तें हो, पैसों का नुकसान हो या कुछ और हो। चीजों के साथ उलझने के बजाए अपने आप को थोडा आराम दें, समय दें। कुछ समय बाद सबकुछ वापस पटरी में आने लगेगा। क्योंकि रात कितनी भी अँधेरी और लम्बी क्यों ना हो, सुबह तो होनी ही है.

so keep smiling and be happy.
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Comments

  1. बेहतरीन लेख है
    कृपया कब्ज़ के बारे में भी लिखे

  2. Anonymous says:

    अपने अनुभवों को अच्छे शब्द देकर अच्छी सलाह दी आपने। ऐसे ही लिखते रहें।

  3. आप बहुत अच्छा लिखते हैं ऐसे टॉपिक हमेशा मददगार साबित होते हैं अगर आप http://www.deepawali.co.in/ इस साईट के लिए कुछ लिखना चाहे तो deepawali.add@gmail.com पर सम्पर्क करें | मुझे कविता लिखने का शौक हैं http://www.deepawali.co.in/winter-poem-in-hindi.html इस पर अपनी टिप्पणी देकर मुझे मार्गदर्शन दे |

    • धन्यवाद कर्णिका जी, मैंने आपकी website देखी बहुत अच्छी लगी . कोशिश करूँगा कि जल्दी ही आपकी website के लिए भी article लिखूं.

    • thnks
      जब भी आपको वक्त मिले आप मेरे ब्लॉग पढ़े और अपने कमेंट्स के जरिये,मुझे गलतियाँ सुधारने का मौका दे |

  4. आदिल जी,
    बहुत अच्छा लेख लिखा है आपने, आजकल तनाब एक प्रमुख समस्या है , इसके समाधान के बारे में लिखने के लिए धन्यवाद !
    द्वारा-
    amulsharma

  5. bhut acha lekh
    mera bhi deke
    http://gyankablog.blogspot.in

    • अच्छा blog बनाया है मोती जी आपने, लोगों का ज्ञान ऐसे ही बढ़ाते रहें

  6. बहुत ही अच्छा लेख.. हमारी जिंदगी तनाव से बहरी पड़ी है और तनाव है तो जिंदगी है.. और जब तक जिंदगी है तनाव होना स्वाभाविक है.. ऐसा कोई भी तरीका नही जिससे हम तनाव को हमेशा के लिए अलविदा कह दें पर उसे कम जरूर किया जा सकता है.. आपने इस लेख के माध्यम से बता दिया कि आप न सिर्फ एक अच्छे इंजीनियर हैं बल्कि एक अच्छे लेखक भी हैं.. वाकई आपके आर्टिकल में दम है.. ऐसा ही लिखते रहें और लोगों को पाजिटिव रखने में अपना अमूल्य योगदान देते रहें.. बहुत अच्छा.. ढेरों शुभकामनाएँ.. इससे सम्बन्धित हमने एक छोटा सा आर्टिकल बनाया था आप जरूर पढ़ें.. http://www.hamarisafalta.com/2014/01/bmd-our-best-theory.html

    • धन्यवाद् किरन जी….. आपके शब्द और लिखने की प्रेरणा देते हैं

  7. बहुत बढ़िया! ख़ास तौर पर चिल्लाने वाला सुझाव…!

    • धन्यवाद…मेरा ऐसा मानना है इस तरह चिल्लाने से मन का सारा विकार बाहर आ जाता है…

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