listening skills को कैसे सुधारें? How to improve listening skills

THE BIGGEST MISTAKE BY MOST HUMAN BEINGS:
                      LISTENING HALF
           UNDERSTANDING QUARTER
                     TELLING DOUBLE

अगर आप अपनी communication skills को सुधारना चाहते हैं तो first improve your listening skills:

listening skills

अभी कुछ समय पहले मैंने एक seminar attend किया। जिसका विषय था how to improve communication skills. उस seminar में हमें बताया गया की कैसे communication skills को improve करने के लिए effective listening skills होना बहुत जरूरी है। वहां कुछ बहुत अच्छी activities करायीं गयी, उन्ही में से एक activity करके यह बताया गया कि अगर listening skills अच्छी नहीं हो तो उसके क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

इस activity को करने के लिए सभी participants को 2 groups में divide किया गया। हर group का एक leader बनाया गया। हमें एक cherry दिखाई गयी और हमें ये बोला गया कि इसके …….. से cancer का इलाज हो सकता है और …… से AIDS का। अब इसको ध्यान से नहीं सुनने के कारण participants ने ये समझा की इस cherry से या तो AIDS का इलाज़ हो सकता है या cancer का। अब हमें AIDS और cancer के ऊपर discuss करना था, ये decide करने के लिए कि ये दवा किस के लिए ज्यादा जरूरी है, AIDS रोगियों के लिए या cancer रोगियों के लिए। हम दोनों groups के बीच बहस start हो गयी। दोनों groups अपने अपने तर्क के द्वारा ये सिद्ध करने में लगे थे की इस दवा की उन्हें ज्यादा जरूरत है।

पहले Group का दावा – AIDS लाइलाज है:

AIDS वाले group का दावा था की ये रोग लाइलाज है, scientists की लगातार कोशिशों के बावजूद अभी तक इसका कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इस रोग की वजह से हजारों लोग हर साल मौत का ग्रास बन जाते हैं। AIDS के रोगियों के साथ समाज में कोई उठता-बैठता नहीं है, उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। बीमारी के साथ साथ उन्हें और भी बहुत कुछ सहना पड़ता है जबकि Cancer के रोगियों के साथ ऐसी कोई समस्या नहीं होती। उन्हें घर परिवार दोस्तों का बराबर प्यार-सहयोग मिलता है, उनकी सेवा होती है और ऐसे ही बहुत सारे तर्क दिए गए जिससे की यह दवा उन्हें मिल जाये।

दूसरे Group का दावा – Cancer ज्यादा जानलेवा है:

ऐसे ही cancer वाले group ने अपने तर्क दिए। उनके हिसाब से cancer भी लाइलाज बीमारी है। सिर्फ initial stage पर जानकारी होने पर ही कुछ हद तक इलाज संभव है। इस बीमारी से भी लाखों लोग हल साल मौत का शिकार हो रहे हैं। उनका आगे तर्क था कि AIDS का इलाज भले ही संभव नहीं है लेकिन कुछ बचाव करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। cancer सिर्फ एक या दो नहीं बल्कि सेकड़ों कारणों से हो जाता है। cancer का initial stage पर पता भी नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए इस दवा की हमें ज्यादा जरूरत है जिससे हम cancer के मरीजों का इलाज़ कर सकें।

यह बहस धीरे-धीरे बहुत गर्म होती जा रही थी। दोनों तरफ के लोग अपने आप को दवा का दावेदार बताने पर लगें थे। 15-20 minutes में तो माहौल बिलकुल संसद जैसा हो गया। दोनों groups के लोग एक दूसरे पर चिल्ला रहे थे और दवा पर अपना दावा ठोक रहे थे, तभी हमारी mentor  वहाँ आ गयी और बोली, लगता है इस तरह तो इस बहस का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने दोनों leaders को खड़ा किया और कहा आप दोनों आपस में decide करके बताओ, अब तक की बहस के हिसाब से यह दवा किसको मिलनी चाहिए। दोनों leader ने आपसी सहमति से finally decide किया कि ये दवा cancer के रोगियों को मिलनी चाहिए, उन्हें इसकी ज्यादा जरूरत है।

Mentor ने जो कहा, वो सबको चौकाने वाला था:

यहाँ mentor ने ये कहकर सबको चौंका दिया की इस cherry से दोनों ही तरह के रोगों का इलाज संभव है पर मेरी बात को ढंग से सुने पहले ही आप लोग अपनी बहस में उलझ गए। मैंने कहा था कि इस cherry के Pulp से cancer का इलाज हो सकता है और Seed से AIDS का। पर आजकल लोग इतनी जल्दी में रहते हैं कि पूरी बात सुनेंगे नहीं और लग जायेंगे काम पर। और यहाँ आप दोनों groups ने भी यही किया, मेरी बात को ढंग से सुने बिना अपना लक्ष्य बना लिया की ये दवा मेरे group को ही चाहिए और हो गए मरने-मारने पर उतारू। क्यों करतें है हम ऐसा ? आखिर किस बात की जल्दी है ? होना ये चाहिए था की पहले तो आपको मेरी बात ढंग से सुननी चाहिए थी, अगर नहीं सुन पाए या मान लो किसी वजह से मेरे बोलते वक़्त आपका ध्यान कहीं और चला गया, तो अपनी बहस start करने से पहले मुझसे एक बार वापस पूछ सकते थे।

इस बात को हम सबने realise किया कि वाकई में अगर हमने mentor की बात को सही ढंग से सुना होता तो ना तो हमारा इतना time ख़राब होता और न ही energy और दोनों तरह के रोगों के लिए दवा तैयार हो जाती।

दोस्तों इस activity से हमें ये बताने की कोशिश की गयी कि poor listening की समस्या की वजह से कई बार हम काम या तो आधा-अधूरा कर देते हैं या फिर कुछ गड़बड़ कर बैठते हैं और इसकी वजह से कई बार हमें घर, बाहर या नौकरी में शर्मिंदगी उठानी पड़ जाती है। ये तो बात हुई परेशानी की, अब अगर कोई परेशानी है तो उसका समाधान भी होना चाहिए।

listening skills improvement tips in Hindi:

सबसे अच्छी बात यह है listening skills को improve करने के लिए हमें किसी expert की जरूरत नहीं है। इसको कुछ प्रयासों से हम खुद ही improve कर सकते हैं। listening skills poor होने का जो root cause है वो है हमारा चंचल मन। ये एक जगह ठहरता ही नहीं है, इधर-उधर, यहाँ-वहाँ भटकता ही रहता है जब तक कि इसके interest की बात नहीं की जाये। अगर हमारे interest की बात है तो हमारा मन कहीं नहीं भटकेगा जैसे कि अगर हमें :

  • movie देखना पसंद है तो movie देखते हुए
  • sports पसंद है तो खेलते या even TV में देखते हुए
  • अपने किसी मनपसंद project पर काम करते हुए

लेकिन अगर हमारे interest की बात नहीं हो रही है तब तो मन को संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है और अगर हम किसी stress या tension में हुए तब तो मन को tension के अलावा किसी और जगह पर स्थिर करना किसी चुनौती से कम नहीं। पर आप अपने आप को इस चुनौती के लिए तैयार करें, बहुत मुश्किल नहीं है ऐसा करना। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने आप से बात करनी पड़ेगी, अपने आप को सुनना पड़ेगा। सबसे अच्छा है कांच के सामने खड़े हो जाईये, किसी भी topic पर बोलिए और अपने एक-एक शब्द को ध्यान से सुनिए। इस बीच अगर ध्यान भटकता है तो तुरन्त अपने सिर को हल्का सा झटका दीजिये इससे आपके आस-पास विचारों की जो layer बन रही है वो टूट जाएगी और आप वापस अपनी जगह पर आ जायेंगे। शुरू-शुरू में ऐसा कई बार करना पड़ेगा लेकिन धीरे-धीरे ये कम होता जायेगा और फिर एक दिन आपको सिर झटकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

listening skills को improve करने के लिए अपने आप को more attentive बनाईये। जिसके पास भी हैं, सिर्फ शरीर से नहीं दिल से भी उसके साथ रहें। छोटे बच्चों के साथ रहिए वो आपको more attentive बनाने में मदद कर सकते हैं। जब बच्चों के साथ रहते हैं तो वो आपको अपनी बात सुना के ही मानते हैं, चाहें आपका मन कहीं भी घूम रहा हो, बच्चे चिल्ला चिल्ला के अपनी बात आपको बता के ही मानेगें और आपसे reaction लेकर ही रहेंगे। ऐसे में उन्हें डांटे नहीं, क्योकिं वो सिर्फ आपका attention चाहता हैं। और अनजाने में बच्चे आपकी मदद ही कर रहे हैं।

Stress दूर करने के आपको एक नहीं सेकड़ों उपाय internet पर मिल जायेगें। जो आपको appeal करें, आप उसको try करें। लेकिन कोई भी उपाय तभी कारगर होगा जब आप अपना attitude change करेंगें, अपनी सोच में बदलाव लेकर आयेंगे। मैंने भी stress भरे दिन देखे हैं और मैं कैसे इससे बाहर आ पाया, एक दिन अपने blog पर जरूर share करूँगा।

Listening skills को improve करने के लिए बड़े-बुजुर्गों की इस बात को भी जरूर याद रखें कि ईश्वर ने हमें 2 कान और 1 मुँह इसलिए दिया है कि हम जितना बोले उससे दुगुना सुने। पर आज होता क्या है , इसका बिलकुल उल्टा। जितना बोलते हैं उसका आधा भी नहीं सुनते। फिर तो काम गड़बड़ ही होंगे।

So friends, keep listening …. ये सिर्फ आपकी communication skills को ही improve नहीं करेगा बल्कि आपकी personality में भी निखार लायेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों को आपसे connect करेगा क्योंकि आप जब लोगों को सुनेंगे तो वो आपसे उतना ही बात करना भी पसंद करेंगे।

उम्मीद है listening skills को कैसे सुधारें? article आपको पसंद आया होगा और आपकी listening skills को improve करने में जरूर आपकी मदद करेगा। अगर आप भी listening skills improve करने के लिए कोई tips देना चाहे या इस article पर अपना व्यू देना चाहें तो comment section के जरिये हमें जरूर इससे अवगत करायें। हमारी मदद करने के लिए इसे Google+, facebook, twitter और दूसरे social platform पर अपने मित्रों के साथ share जरूर करें।

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